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नैनीताल होटलो में 50 फीसदी छूट
नैनीताल | ऑफ़ सीजन के चलते नैनीताल सहित आसपास के होटलों में 50 फीसदी तक छूट चला रही हैं। नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह का कहना है कि ऑफ़ सीजन रेट चल रहे है। मैदानों में प्रदूषण मार झेल रहे लोग यहां आकर सेहत के लिए अनुकूल मौसम का लुफ्त उठा सकते हैं।
नैनीताल में खिल रही गुनगुनी घूप
मैदानों में दमघोटू धुएं से निजात पानी हो तो कुछ दिन नैनीताल आइए। सरोवरनगरी सहित पूरे कुमाऊ में मौसम खुशगवार हैं गुनगुनी घूप लोगो को खासी राहत पहुंचा रही हैं। हालांकि यहां सुबह-शाम गरम कपड़ों की जरूरत हैं, लेकिन तापमान इस बीच अनुकूल बना हुआ है।
उत्तराखंड में टूरिज्म का नया तरीका कर देगा हैरान
देश में विभिन्‍न कोनों में रहे उत्तराखंडियों की रिश्तेदारी उत्तराखंड के टूरिज्म को नई दिशा प्रदान करेगी। कैसे जानने के लिए पढ़ें...
कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
गनेरी मैया मंदिर में चल रहे आठों कौतिक में शुक्रवार को तीसरे दिन भी लोक कलाकारों और स्कूली बच्चों ने संस्कृति के ऐसे रंग बिखेरे की दर्शक झूम उठे। इस दौरान हास्य कलाकारों की रचनाओं ने सभी को लोटपोट कर दिया।
थिरकी पर्यटन नगरी
रानीखेत : 'खोल दे माता खोल भवानी धार में किवाड़ा..', सुदूर मंगचौड़ा के धार में दिल को छू देने वाली मां भगवती की स्तुति। पहाड़ की खड़ी चढ़ाई पर चैत के झोड़ा गीत पर बढ़ते कदम जैसे थकान पर भारी पड़ रहे थे। बुजुर्ग महिला-पुरुष गायकों की उमंग से भरी टोली युवा पीढ़ी को चैत्र मास की इस परंपरा को जिंदा रखने का संदेश देते माठू-माठ पर्यटन नगरी पहुंची। जहां पारंपरिक हुड़के की गमक, ढोलक की थाप व मजीरे की खनक पर दिन पर झोड़ा गीतों मोहक ध्वनि मुग्ध करती रही।
नैनी झील के 'प्राण' सूखाताल में
नैनी झील नैनीताल की जीवनदायिनी है और इस झील के प्राण सूखाताल पर टिके हैं। यकीन भले न हो, लेकिन वैज्ञानिकों की ताजा रिपोर्ट यही कहती है। हर साल सूखाताल से 50 प्रतिशत पानी जमीन से रिसते हुए नैनी झील तक पहुंचता है और झील तक आते-आते इसे कई महीने लग जाते हैं। यही नहीं, शहर का पर्दाधारा स्रोत भी सूखाताल पर निर्भर है। वैज्ञानिकों ने अपनी संस्तुति में चेताया है कि अगर सूखाताल को बचाया न गया तो नैनी झील के अस्तित्व के लिए खतरा बढ़ जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी को कुछ सुझाव सौंपे गए हैं।
नेचर, एडवेंचर और वाइल्ड लाइफ का पैकेज
धनोल्टी देवदार, बांझ और ओक के घने जंगलो के बीच ‌स्थित उत्तराखंड का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। पहाड़ों की रानी मसूरी से चंबा मार्ग पर महज 24 किमी की दूरी पर यह स्थित है। धनोल्टी 2286 मीटर की ऊंचाई पर प्रकृति की गोद में बसा हुआ है, जहां से हिमालय की कई चोटियों का दीदार किया जा सकता है। तो फिर सोच क्या रहे हैं, राजधानी दून से 60 किमी दूर ही तो जाना है ना...हो जाइये तैयार प्रकृति की गोद में सुकून की नींद और हिमालय की ठंडक समेटने के लिए।
पर्यटकों को खूब भा रही हैं चोपता की वादियां
बदरीनाथ और केदारनाथ धामों के साथ ही पंच केदारों को जोड़ने वाले ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर मोटर मार्ग और इसके समीप अभी भी तीन फीट बर्फ जमी हुई है। उत्तराखंड के मिनी स्विटरलैंड कहे जाने वाले चोपता में भी पर्यटक आने लगे हैं। यहां प्रतिदिन 15 से अधिक यात्री पहुंचने लगे हैं।
पर्यटन, साहसिक खेलों के लिए उत्तराखंड सुरक्षित
पर्यटन और साहसिक खेलों के लिहाज से उत्तराखंड पूरी तरह सुरक्षित है। अब यह संदेश एडवेंचर टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया पर्यटकों को देगी।

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